महराजगंज जिले की ग्रामसभा बरगदवा राजा में मनरेगा कार्यों और इंडिया मार्क हैंडपंपों की मरम्मत में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने शिकायत पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर तथ्य सामने आ सकते हैं।
मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्रामसभा में संचालित मनरेगा कार्यों में वास्तविक मजदूरों की संख्या कम होने के बावजूद अधिक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई है।ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टर रोल में फर्जी हाजिरी लगाकर भुगतान कराया गया। साथ ही कुछ ऐसे नाम भी दर्ज किए गए हैं, जो कथित रूप से कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज श्रमिकों और मौके पर कार्यरत लोगों की संख्या में बड़ा अंतर है।
प्रधान परिवार से जुड़े लोगों के नाम दर्ज होने का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि मस्टर रोल में प्रधान परिवार से जुड़े कुछ लोगों के नाम दर्ज कर भुगतान प्राप्त किया गया है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
हैंडपंप मरम्मत में भी गड़बड़ी की आशंका
मनरेगा के अलावा ग्रामीणों ने इंडिया मार्क हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर भी सवाल उठाए हैं।उनका आरोप है कि कई हैंडपंपों की वास्तविक मरम्मत कराए बिना ही मरम्मत मद में धनराशि निकाल ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर हैंडपंपों की स्थिति आज भी खराब बनी हुई है, जबकि अभिलेखों में मरम्मत कार्य पूर्ण दर्शाया गया है।
तकनीकी और वित्तीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यदि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी वसूली भी सुनिश्चित की जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
शिकायत सामने आने के बाद गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।यदि प्रशासन द्वारा जांच के आदेश जारी किए जाते हैं तो मामले से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

