लखनऊ स्थित राजभवन में शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU), लखनऊ द्वारा डिजिटल एग्जामिनेशन इकोसिस्टम को लेकर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। विश्वविद्यालय ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए अपनाई जा रही तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
सीसीटीवी, बारकोडिंग और बायोमेट्रिक से हो रही निगरानी
प्रस्तुतिकरण के दौरान बताया गया कि परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। इसके साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं पर बारकोडिंग, बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों को लागू किया गया है। सभी परीक्षा केंद्रों से प्राप्त उत्तर पुस्तिकाओं को विश्वविद्यालय में स्कैन किया जाता है, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाती है।
नकल में लिप्त छात्रों के अभिभावकों से संवाद के निर्देश
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने परीक्षा व्यवस्था, प्रश्न पत्रों की समयबद्ध तैयारी, परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों की तैनाती, मूल्यांकन प्रक्रिया और समय पर परिणाम घोषित किए जाने से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नकल में संलिप्त पाए जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे संवाद किया जाना चाहिए। यह समझने का प्रयास किया जाए कि किन परिस्थितियों में छात्र इस तरह के कृत्य के लिए मजबूर हुए। राज्यपाल ने कहा कि संवाद बच्चों को सही दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
गुजरात के अनुभव साझा कर दी अहम सीख
राज्यपाल ने गुजरात के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कुछ छात्र असफलता के कारण आत्मघाती विचारों से घिर गए थे। उन्होंने स्वयं विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद कर उत्तर पुस्तिकाएं मंगवाईं, जिनमें कई स्थानों पर कुछ भी लिखा नहीं था। उन्होंने अभिभावकों को विद्यालय जाकर शिक्षकों से चर्चा करने और बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की सलाह दी।
मूल्यांकन प्रक्रिया को और सख्त व निष्पक्ष बनाने पर बल
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान जहां गलती हो, वहीं स्पष्ट रूप से अंकन किया जाना चाहिए, ताकि पुनः जांच कराने वाले विद्यार्थी अपनी कमियों को समझ सकें। उन्होंने गलत मूल्यांकन पाए जाने पर आर्थिक दंड का प्रावधान करने का भी सुझाव दिया। साथ ही यह भी कहा कि पीजी स्तर के विद्यार्थियों से सीमित संख्या में निचली कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया जा सकता है।
छात्रों की रुचि के अनुसार कौशल विकास पर जोर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार विषयों का चयन और आवश्यक कौशल विकसित किया जाना चाहिए, क्योंकि जिस क्षेत्र में रुचि होती है, उसमें बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के पृष्ठों की औसत संख्या का आकलन कर उसी के अनुरूप पृष्ठ निर्धारित करने का सुझाव भी दिया, जिससे अनावश्यक कागज की बर्बादी रोकी जा सके।
AKTU को परीक्षा प्रणाली और मजबूत करने के निर्देश
बैठक के अंत में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों के हित में मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं तकनीक आधारित बनाया जाए। उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में AKTU की भूमिका को और अधिक सशक्त करने पर बल दिया।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा पंकज एल. जानी, AKTU के कुलपति प्रो. जे.पी. पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

