Site icon UP की बात

सुदृढ़ आजीविका की नई पहल, 100 महिलाओं के घर लगे बायोगैस प्लांट

गोरखपुर: योगी सरकार के प्रयासों से डेयरी सेक्टर से जुड़ी महिलाओं को दोहरा लाभ मिल रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोडयूसर्स ऑर्गनाइजेशन की सदस्य/शेयरहोल्डर बनीं महिलाओं ने न केवल आजीविका को सुदृढ़ किया है बल्कि अब उनके घर की ईंधन संबंधी जरूरतें भी मुफ्त में पूरी होती दिख रही हैं। इस एमपीओ ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से शुरुआती चरण में 100 सदस्य महिलाओं के घर घरेलू बायोगैस प्लांट स्थापित कराया है। इससे इन महिलाओं की रसोई अब गोबर गैस से पकने लगी है। प्लांट का अवशेष खेती के लिए जैविक खाद के रूप में काम आ रहा है। एमपीओ का लक्ष्य हर सदस्य महिला के घर घरेलू बायोगैस का प्लांट स्थापित करने का है।

 

श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन का गठत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से हुआ है। वर्ष 2019 में बनी बुंदेलखंड की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर्स कंपनी से जुड़ी महिलाओं द्वारा डेयरी सेक्टर में दिए जा रहे उल्लेखनीय योगदान और इसके जरिये लिखी जा रही महिला स्वावलंबन की कहानी को देखते हुए सीएम योगी ने अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी वाले मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन (एमपीओ) बनाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में गोरखपुर में श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ का गठत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से किया गया।

करीब ढाई साल पहले क्रियाशील हुई इस एमपीओ के जरिये डेयरी सेक्टर से जुड़कर पूर्वी उत्तर प्रदेश की 51000 से अधिक ग्रामीण घरेलू महिलाओं ने आर्थिक स्वावलंबन की राह पकड़ ली है। ये महिलाएं घरेलू कामकाज निपटाने के साथ ही दुग्ध उत्पादन/संग्रह के रोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिकी को भी मजबूत कर रही हैं। एमपीओ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) धनराज साहनी बताते हैं कि कम समय में ही, सदस्य महिलाओं के परिश्रम से एमपीओ का टर्नओवर करीब 200 करोड़ रुपये का हो चुका है। यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की कहानी है। सीईओ का कहना है कि एमपीओ की इस शानदार उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन का परिणाम है। उनकी प्रेरणा और दूरदर्शी दृष्टिकोण से ग्रामीण क्षेत्र की हजारों महिलाएं आत्मनिर्भरता और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

एमपीओ ने अब सदस्य महिलाओं को दोहरा लाभ दिलाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके जरिये सदस्यों के घरों के पीछे अब तक 100 घरेलू बायोगैस संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। एमपीओ के सीईओ बताते हैं कि यह पहल ग्रामीण परिवारों के लिए स्वच्छ ऊर्जा, अतिरिक्त बचत तथा सतत आय का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। पशुओं के गोबर से तैयार होने वाली बायोगैस दिन-रात उपलब्ध रहती है, जिससे परिवारों को रसोई गैस की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होती है। इससे ईंधन पर होने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आती है। इसके साथ ही बायोगैस संयंत्र से निकलने वाला जैविक स्लरी (खाद) खेतों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत में भी बचत होती है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

एमपीओ की महिला सदस्य इस पहल से अत्यंत उत्साहित हैं। भरोहिया ब्लॉक के रखही निवासी राजकुमारी देवी बताती हैं कि बायोगैस संयंत्र से उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, समय की बचत, रसोई खर्च में कमी तथा अतिरिक्त जैविक खाद के रूप में दोहरा लाभ प्राप्त हो रहा है। गोला क्षेत्र के ग्राम परसिया की रोशनी यादव का कहना है कि एमपीओ से जुड़कर दूध संग्रह करने से आमदनी भी बढ़ी है और अब बॉयोगैस प्लांट से घर की रसोई के लिए ऊर्जा की जरूरत भी आसानी से पूरी हो रही है।

Exit mobile version